
सदन मे मुख्यमंत्री के दिए बयान पर कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा की
जिस उर्दू की मुहब्बत में राम प्रसाद “बिस्मिल” हो गये, जिस उर्दू की मुहब्बत में रघुपति सहाय “फ़िराक़ गोरखपुरी” हो गये।
बृजनारायण “चकबस्त” हो गये, पं हरिचंद “अख़्तर” हो गये, सम्पूर्ण सिंह कालरा “गुलज़ार” हो गये।
जिस उर्दू में भगत सिंह ख़त लिखा करते थे, जिस उर्दू को ख़ुद गॉंधी जी हिंदुस्तानी भाषा कहते हैं, जिस भाषा से नेहरू और पटेल ने प्यार किया।
जिस भाषा ने इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा दिया, जिस भाषा ने जय हिंद का नारा दिया, जिस भाषा में मुहब्बत और बग़ावत के गीत गाये गये !
*आज एक सूबे के मुखिया उसी भाषा को कठमुल्ला की भाषा कह रहे हैं।*
उन्हें कोई बताये कि उर्दू ‘कठमुल्ला’ की नहीं बल्कि आनंद नारायण ‘मुल्ला’ की ज़बान है।
‘मुल्ला’ बना दिया है इसे भी महाज़-ए-जंग
इक सुल्ह का पयाम थी उर्दू ज़बाँ कभी।
श्री चौबे ने आगे कहा की मै माननीय मुख्यमंत्री जी के शब्दों की कड़े शब्दों में कड़ी निन्दा करता हूं व मांग करता हु अगर मुख्यमंत्री योगी जी के अन्दर नैतिकता व संविधान के प्रति आदर बचा हो तो तत्काल प्रभाव से माफी मांगे!!