Rohan Bopanna Retirement: 22 साल बाद थमा टेनिस का तूफान, रोहन बोपन्ना ने भावुक पोस्ट के साथ कहा खेल जगत को अलविदा

Rohan Bopanna Retirement: 22 साल बाद थमा टेनिस का तूफान, रोहन बोपन्ना ने भावुक पोस्ट के साथ कहा खेल जगत को अलविदा

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भारत के स्टार टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने आखिरकार अपने 22 साल के शानदार करियर को अलविदा कह दिया है. उनका आखिरी मुकाबला पेरिस मास्टर्स 1000 में हुआ, जहां उन्होंने एलेक्जेंडर बुब्लिक के साथ डबल्स मैच खेला. बोपन्ना ने इस साल की शुरुआत में ही इतिहास रचा था जब वे डबल्स में सबसे उम्रदराज ग्रैंड स्लैम विजेता और वर्ल्ड नंबर वन बने थे. सोशल मीडिया पर उन्होंने एक भावुक पोस्ट शेयर कर अपने रिटायरमेंट की घोषणा की जिसने हर फैन को भावुक कर दिया.

दिल छू लेने वाला संदेश

रोहन बोपन्ना ने अपने बयान में लिखा कि किसी ऐसी चीज को अलविदा कहना बेहद कठिन है जिसने जिंदगी को मायने दिए हों. उन्होंने कहा कि टूर पर बीते बीस साल अविस्मरणीय रहे और अब वक्त है कि मैं अपना रैकेट रख दूं. बोपन्ना ने लिखा कि भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है. जब भी वे कोर्ट पर उतरे उन्होंने अपने देश के झंडे के लिए खेला. उन्होंने बताया कि उनका दिल भारी भी है और आभारी भी क्योंकि कूर्ग के छोटे से शहर से शुरुआत कर दुनिया के सबसे बड़े कोर्ट तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं था.

टेनिस से मिली जिंदगी की सीख

रोहन ने आगे कहा कि टेनिस उनके लिए केवल खेल नहीं बल्कि जीवन का सहारा रहा. जब दुनिया ने शक किया तब इसी खेल ने उन्हें विश्वास दिया. जब वे टूटे तब यही खेल उनकी ताकत बना. उन्होंने कहा कि हर मैच ने उन्हें सिखाया कि गिरने के बाद उठना क्या होता है और हार के बाद लड़ना कैसे जारी रखा जाता है. यही टेनिस ने उन्हें बार-बार याद दिलाया कि उन्होंने शुरुआत क्यों की थी और वे कौन हैं.

अविस्मरणीय उपलब्धियां

45 साल के रोहन बोपन्ना ने अपने करियर में दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीते. उन्होंने 2024 में मैथ्यू एबडेन के साथ ऑस्ट्रेलियन ओपन मेंस डबल्स और 2017 में गैब्रिएला डाब्रोव्स्की के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स डबल्स का खिताब अपने नाम किया. इसके अलावा वे चार और ग्रैंड स्लैम फाइनल्स में पहुंचे. 2020 और 2023 के यूएस ओपन में उन्होंने मेंस डबल्स फाइनल खेला और 2018 तथा 2023 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में मिक्स डबल्स फाइनल तक पहुंचे. साल 2012 और 2015 में वे एटीपी फाइनल्स के फाइनल में भी पहुंचे थे.

कूर्ग से कोर्ट तक की कहानी

रोहन बोपन्ना का सफर आसान नहीं रहा. कूर्ग के एक सामान्य परिवार से आने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए लकड़ी काटी और कॉफी बागानों में दौड़ लगाई. उन्होंने खुद को बेहतर बनाने के लिए हर संभव कोशिश की और आज उनकी मेहनत ने उन्हें भारतीय टेनिस का प्रतीक बना दिया. रिटायरमेंट के बाद भी वे टेनिस को आगे बढ़ाने में जुटे हैं. उन्होंने भारत में यूटीआर टेनिस प्रो की शुरुआत की और अपनी एकेडमी के जरिए युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

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