CJI भूषण गवई ने दी न्यायालय के लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर, भव्यता के साथ साधारणता भी जरूरी

CJI भूषण गवई ने दी न्यायालय के लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर, भव्यता के साथ साधारणता भी जरूरी

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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण गवई ने मुंबई में बनने वाली नई बॉम्बे हाई कोर्ट की इमारत को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने जोर दिया है कि यह इमारत फिजूलखर्ची से दूर रहे और न्याय का मंदिर बने, न कि एक 7 स्टार होटल जैसा भव्य स्थल। यह भावनाएँ उन्होंने 14 मई 2025 को बांद्रा पूर्व में नई कोर्ट बिल्डिंग की नींव रखने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त कीं।

न्याय का मंदिर, ना कि महंगा भवन

CJI गवई ने स्पष्ट किया कि नई हाई कोर्ट की इमारत को साम्राज्यवादी और अत्यधिक भव्यता वाली संरचना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि, यह संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इमारत के निर्माण में फिजूलखर्ची से बचा जाए। उन्होंने कहा, “यह इमारत न्याय का मंदिर बने, 7-स्टार होटल नहीं।”

उन्होंने बताया कि कुछ समाचारों में यह दावा किया गया कि इमारत फिजूलखर्ची वाली होगी, परंतु इसका विरोध करते हुए उन्होंने बताया कि न्यायाधीशों के लिए सिर्फ एक लिफ्ट साझा की गई है। न्यायपालिका के सभी अंग—चाहे वे हाई कोर्ट, ट्रायल कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट हों—देश के अंतिम नागरिक की सेवा के लिए काम करते हैं, और यह इमारत उन्हीं मूल्यों का प्रतिबिंब होनी चाहिए।

जज अब जमींदार नहीं

CJI भूषण गवई ने कहा, “जज अब जमींदार नहीं रहे।” यह संकेत है कि न्यायाधीशों को समाज की सेवा करने वाले सच्चे जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाना चाहिए न कि किसी उच्च पदाधिकारी की तरह। कोर्ट की योजना बनाते समय जजों की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है, लेकिन इसके साथ-साथ जनता और मुकदमेबाजों की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। न्यायालयों का उद्देश्य लोगों को न्याय देना है, इसलिए भवन का स्वरूप भी उसी के अनुरूप होना चाहिए।

कार्यकाल का आखिरी मील का पत्थर

CJI गवई ने यह भी साझा किया कि 24 नवंबर 2025 से उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और मुंबई का यह उनका आखिरी न्यायिक दौरा है। शुरुआत में वह इस नींव समारोह में शामिल होने से हिचकिचा रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण अवसर माना। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के इतिहास में यह एक अहम और मील का पत्थर साबित होगा।

न्यायपालिका की सेवा में समर्पण

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका का उद्देश्य मुकदमेबाजों की सेवा करना है, जो न्याय की तलाश में आते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में न्यायिक ढांचे की आलोचना करने वालों से असहमति जताई और कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने राज्य में कई न्यायिक इमारतों की नींव रखी या उद्घाटन किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई कोर्ट बिल्डिंग मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर एक आइकॉनिक संरचना बनेगी।

CJI भूषण गवई का यह संदेश स्पष्ट है कि नई बॉम्बे हाई कोर्ट की इमारत केवल भव्यता का प्रतीक न होकर न्याय की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की अभिव्यक्ति होनी चाहिए। यह इमारत फिजूलखर्ची से दूर, न्यायालय की गरिमा बनाए रखने वाली और जनता की सेवा में समर्पित एक स्थल होनी चाहिए। न्यायपालिका का उद्देश्य हमेशा समाज को न्याय प्रदान करना है, और नई इमारत भी इसी उद्देश्य को प्रतिबिंबित करे।

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